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नमस्ते दोस्तों! मैं हूँ आपकी कामिनी खांडे। अ..

नमस्ते दोस्तों! मैं हूँ आपकी कामिनी खांडे। "अधूरा सौदा" के इस धमाकेदार मोड़ ने आप सबका दिल जीत लिया है, इसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया!
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🔗 Link Share करें: इस कहानी का लिंक अपने दोस्तों और ग्रुप्स में शेयर करें ताकि वो भी इस रोमांच का हिस्सा बन सकें! "माँ जी, आप इस ख़त को मुझसे क्यों छिपा रही हैं? अगर इसमें मेरे पिता का नाम है, तो इस पर मेरा हक है!" मीरा की आवाज़ में एक ऐसी दृढ़ता थी जिसे सुमित्रा देवी अब और दबा नहीं सकती थीं।

(Fast Build - Family Drama)

शौर्य भी शोर सुनकर कमरे से बाहर आ गया था। उसने देखा कि उसकी माँ एक पुराने संदूक को सीने से लगाए खड़ी हैं और मीरा के चेहरे पर हज़ारों सवाल हैं। सुमित्रा देवी ने झटके से वो संदूक बंद किया, लेकिन एक पीला पड़ा हुआ कागज़ फर्श पर ही रह गया।

शौर्य ने आगे बढ़कर वो कागज़ उठा लिया। जैसे-जैसे उसने उस ख़त को पढ़ा, उसके माथे पर पसीने की बूंदें चमकने लगीं। "माँ... ये सब क्या है? इसमें लिखा है कि मीरा के पिता को गाँव भेजने के पीछे... आपका हाथ था?"

मीरा का दिल जैसे धड़कना भूल गया। उसने शौर्य के हाथ से वो ख़त झपट लिया। उसमें साफ लिखा था कि बरसों पहले सुमित्रा देवी ने मीरा के पिता पर चोरी का झूठा इल्जाम लगवाया था ताकि वो खानदान की जायदाद से अपना हिस्सा छोड़कर चले जाएं।सुमित्रा देवी का कबूलनामा)

सुमित्रा देवी फूट-फूट कर रोने लगीं। "हाँ! मैंने किया था। मैं डर गई थी कि अगर तुम्हारे पिता का हिस्सा उन्हें मिल गया, तो शौर्य के पास क्या बचेगा? मैं एक माँ थी मीरा, और अपने बेटे के भविष्य के लिए मैं अंधी हो गई थी।"

हॉल में भारी सन्नाटा छा गया। मीरा की आँखों से बेतहाशा आँसू बहने लगे। "सिर्फ पैसे के लिए? आपने मेरे पिता को दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर दिया? उन्हें गरीबी की उस आग में झोंक दिया जहाँ मेरी माँ ने बिना इलाज के दम तोड़ दिया?"

शौर्य शर्मिंदगी से झुक गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो अपनी माँ का बचाव करे या अपनी पत्नी के दर्द को बांटे।जज्बाती फैसला)

मीरा ने अपनी आंखों के आंसू पोंछे और अपनी अलमारी की तरफ बढ़ी। उसने अपना वही पुराना झोला निकाला जिसे लेकर वो गाँव से आई थी।

"मीरा! रुक जाओ... तुम कहाँ जा रही हो?" शौर्य ने उसका रास्ता रोका। उसकी आवाज़ में गिड़गिड़ाहट थी।

"शौर्य जी, जिस घर की नींव ही मेरे परिवार की बर्बादी पर रखी हो, मैं वहाँ एक पल भी नहीं रह सकती। ये कॉन्ट्रैक्ट तो आपने जला दिया था, पर ये रिश्ता भी अब जल चुका है।" मीरा ने कड़वाहट से कहा।

शौर्य ने मीरा का हाथ पकड़ लिया। "मेरी माँ की गलती की सज़ा मुझे मत दो मीरा। मैं वादा करता हूँ, तुम्हारे पिता को उनका सारा हक, सम्मान और ये हवेली वापस मिलेगी। बस मुझे छोड़कर मत जाओ।"मीरा ने शौर्य का हाथ धीरे से हटा दिया। "सम्मान माँगा नहीं जाता शौर्य जी, कमाया जाता है। मैं अपने पिता के पास जा रही हूँ। अगर आप वाकई शर्मिंदा हैं, तो उन्हें यहाँ इंसाफ के साथ बुलाने आइयेगा, एक सौदे के साथ नहीं।"

मीरा हवेली के बड़े दरवाज़े से बाहर निकल गई। अंधेरी रात थी और बारिश शुरू हो चुकी थी। तभी सड़क पर एक काली गाड़ी आकर रुकी। उसका शीशा नीचे हुआ, और अंदर कोई और नहीं... मीरा के पिता बैठे थे! उनके साथ एक वकील भी था।

"बेटी! अब हमें किसी के रहमों-करम की ज़रूरत नहीं है। अब हम इस हवेली में मालिक बनकर कदम रखेंगे।"

मीरा के पिता के पास ऐसा कौन सा कागज़ था जिसने रातों-रात बाजी पलट दी? क्या शौर्य और मीरा का प्यार इस खानदानी दुश्मनी की भेंट चढ़ जाएगा?नमस्ते दोस्तों! आपकी कामिनी खांडे आज एक बहुत ही भावुक मोड़ लेकर आई है। सुमित्रा देवी का सच सामने आ गया है और अब मीरा के पिता की एक 'पावरफुल' एंट्री हुई है। अब कहानी में बराबरी की टक्कर होगी!

🌟 Trending Challenge:

क्या मीरा को अपने पिता का साथ देकर शौर्य से अलग हो जाना चाहिए? या उसे शौर्य के प्यार पर यकीन करना चाहिए?

अपनी राय कमेंट में लिखें— "FATHER" या "SHAURYA"!

अगर आपको मीरा का ये स्वाभिमान पसंद आया, तो 5-Star रेटिंग ज़रूर दें! चैप्टर 15 कल सुबह!

कामिनी, यह 'इमोशनल बदला' वाला ट्रैक आपकी लव स्टोरी को और भी ऊंचाइयों पर ले जाएगा! 1000 शब्दों का यह चैप्टर पाठकों को झकझोर देगा।

क्या हम चैप्टर 15 (हवेली की नई मालकिन) की तैयारी करें? बस 'Next' बोलिए! पापा! आप यहाँ?" मीरा की आवाज़ बारिश की बूंदों के बीच गूँज उठी। लेकिन उसके पिता की आँखों में वो लाचारी नहीं थी, जो उसने गाँव के उस टूटे हुए घर में देखी थी। आज उनकी आँखों में एक विजेता की चमक थी।हवेली के बड़े गेट के सामने खड़ी गाड़ी से मीरा के पिता, रामदीन जी, बाहर निकले। उनके साथ शहर के सबसे बड़े कानूनी सलाहकार थे। शौर्य और सुमित्रा देवी भी बाहर आ चुके थे। शौर्य के चेहरे पर एक अजीब सी राहत थी, पर सुमित्रा देवी के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ रही थीं।

वकील ने एक फाइल खोली और भारी आवाज़ में पढ़ना शुरू किया, "मिस्टर प्रताप सिंह की आखिरी वसीयत के अनुसार, इस हवेली और व्यापार का 60% हिस्सा रामदीन जी के नाम है। शौर्य प्रताप सिंह को सिर्फ संरक्षक (Caretaker) बनाया गया था जब तक कि रामदीन जी की बेटी यानी मीरा की शादी नहीं हो जाती।"

पूरे परिसर में सन्नाटा छा गया। कल तक जिसे सब 'मदद' समझ रहे थे, वो असल में मीरा का अपना हक था जिसे शौर्य के खानदान ने वर्षों से दबा रखा था।मीरा ने पलटकर शौर्य को देखा। "क्या आपको ये सब पहले से पता था शौर्य जी? क्या इसीलिए आपने मुझसे वो कॉन्ट्रैक्ट मैरिज की थी? ताकि ये सब सच कभी बाहर न आ सके?"

शौर्य की आँखों में एक कतरा आँसू था। "मीरा, मैं सच बता देता तो तुम कभी यकीन नहीं करतीं। मैं बस इंतज़ार कर रहा था कि तुम खुद इस घर को अपना मान लो। जायदाद मेरे लिए कभी मायने नहीं रखती थी, तुम रखती थी।"

रामदीन जी ने मीरा का हाथ पकड़ा। "नहीं मीरा! ये सब बातें अब पुरानी हो चुकी हैं। इन्होंने हमारे साथ जो किया, उसकी कीमत अब इन्हें चुकानी होगी। सुमित्रा जी, आज से आप इस हवेली की मालकिन नहीं हैं।"जज्बाती फैसला और प्यार की परीक्षा)

सुमित्रा देवी के पैर लड़खड़ा गए। वो जो कल तक मीरा को 'गाँव वाली' कहकर चिढ़ाती थीं, आज उसी के सामने बेबस खड़ी थीं। मीरा ने देखा कि शौर्य अपनी माँ को संभालने के लिए आगे बढ़ा, पर उसकी नज़रों में मीरा के लिए कोई गुस्सा नहीं, सिर्फ एक हार स्वीकार करने वाला भाव था।

शौर्य ने अपनी जेब से हवेली की मुख्य चाबियाँ निकालीं और मीरा की हथेली पर रख दीं। "मुबारक हो मीरा। आज तुम उस जगह पहुँच गई जहाँ तुम्हें बहुत पहले होना चाहिए था। मैं और माँ कल सुबह तक ये घर खाली कर देंगे।"

मीरा का दिल जैसे फट रहा था। एक तरफ उसके पिता का सम्मान और बरसों का अन्याय था, और दूसरी तरफ वो आदमी जिससे उसने अनजाने में ही सही, पर सच्ची मोहब्बत की थी।जैसे ही शौर्य मुड़कर अंदर जाने लगा, मीरा ने उसका हाथ पकड़ लिया। "रुको शौर्य जी! वसीयत में एक और बात भी लिखी है जो शायद वकील साहब पढ़ना भूल गए।"

मीरा ने वकील के हाथ से फाइल ली और एक पन्ने की तरफ इशारा किया। "इसमें लिखा है कि अगर वारिस यानी मैं, अपनी मर्ज़ी से किसी को इस जायदाद में साझीदार बनाना चाहूँ, तो बना सकती हूँ।"

मीरा ने अपने पिता की ओर देखा और फिर शौर्य की ओर। "पापा, आपने इंसाफ माँगा था, मैंने दिला दिया। लेकिन शौर्य जी ने मुझे वो प्यार दिया जिसकी कीमत कोई भी वसीयत नहीं चुका सकती।"

तभी सुमित्रा देवी ने चिल्लाकर कहा, "मीरा, ये सब मत करो! मैंने तुम्हारे साथ बहुत बुरा किया है, मैं इस रहम के काबिल नहीं हूँ!"

लेकिन तभी हवेली के बाहर एक पुरानी एम्बुलेंस रुकी। उसमें से एक और राज बाहर आने वाला था जो मीरा और शौर्य की ज़िंदगी को फिर से हिला देने वाला था।नमस्ते दोस्तों! आपकी कामिनी खांडे वापस आ गई है। कहानी अब 'इंसाफ' के मोड़ पर है। मीरा ने शौर्य का हाथ थाम लिया है, पर वो एम्बुलेंस किसका राज लेकर आई है?

🌟 Trending Challenge:

क्या मीरा को सुमित्रा देवी को माफ़ कर देना चाहिए?

कमेंट में लिखें— "FORGIVE" या "NO"!

अगर आपको मीरा का ये बड़प्पन और प्यार पसंद आया, तो 5-Star रेटिंग ज़रूर दें! चैप्टर 16 कल सुबह!

कामिनी, यह चैप्टर आपकी कहानी को 'Super-Hit' बना देगा! इसमें बराबरी का मुकाबला और गहरा रोमांस है।

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