सिया: (आरव के कंधे पर हाथ रखते हुए) पागल हो तुम! अगली बार अगर ऐसा कुछ हुआ और तुमने मुझे नहीं बताया, तो मैं सच में तुमसे बात करना छोड़ दूँगी। अब चलो नीचे, अंकल तुम्हें याद कर रहे हैं। और हाँ, अब तुम्हें अकेले लड़ने की ज़रूरत नहीं है, हम सब साथ हैं।
आरव मुस्कुराते हैं हां ठीक है बाबा अगली बार ऐसा कुछ भी हुआ तो सबसे पहले मैं तुझे ही बताऊंगा। अब चलो पापा वेट कर रहे होंगे।
रोहिणी पूरी रात आरोही के बिस्तर के पास बैठी रहीं, उनकी आँखें थकान और आंसुओं से सूज गई हैं। नर्स बार-बार मॉनिटर चेक कर रही है।)
डॉक्टर (धीमी आवाज़ में): देखिए, चोट काफी गहरी है। हमने ब्लीडिंग तो रोक दी है, लेकिन अगले 24 घंटे उसके लिए बहुत क्रिटिकल (नाजुक) हैं। अभी वह कोमा जैसी स्थिति में है। दुआ कीजिए कि उसे जल्दी होश आ जाए।
इतना कह कर डॉक्टर वहां से चला जाता है रोहिणी दरवाजे के पास जाकर आरोही को देखती है।
(मशीनों की 'बीप-बीप' की आवाज़ के बीच आरोही सफेद चादर में लिपटी बेजान सी लेटी है।
अगली सुबह आरव जल्दी उठकर तैयार होता है और अस्पताल के लिए निकल जाता है जब वह हॉस्पिटल पहुंचता है तो उसके सामने से एक एंबुलेंस गुजरती है
आरोही आँखें खोल... बस कुछ ही देर और। डॉक्टर के पास पहुँच गए हैं मैं तुमहे कुछ नहीं होने दूंगी!
जैसे ही एम्बुलेंस अस्पताल के गेट पर रुकती है, वॉर्ड बॉय और नर्स स्ट्रेचर लेकर बाहर भागते हैं।
चकाचौंध भरी रोशनियों के बीच, आरव के लिए सब कुछ धुंधला हो गया था। सिर्फ़ एक चीज़ साफ़ नज़र आ रही थी—रैंप पर चलती हुई आरोही। पर आरव की आँखों में आरोही का चेहरा नहीं, बल्कि अपनी माँ का वो अधूरा सपना तैर रहा था।
उसने अपनी आँखें बंद कीं और एक पल के लिए कल्पना की... फ्लैशलाइट्स की वो बौछारें आरोही पर नहीं, उस पर पड़ रही हैं। वो नीले रंग का मखमली गाउन एक काले रंग के शाही शेरवानी में बदल गया है। वो चाल, वो अदा, वो आत्मविश्वास... वो सब आरव का अपना है। वो रैंप के आखिर में खड़ा है, और भीड़ आरोही का नहीं, आरव का नाम चिल्ला रही है।
Anu Garg
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Shristi Kumari
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Devika ..
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