उसकी आँखों में गहरी शांति थी।
“यह बलिदान… सिर्फ शक्ति का नहीं होता।”
“यह दिल का होता है।”
वह धीरे-धीरे उस अग्नि के पास गया।
अर्जुन चौंक गया—
“ऋत्विक… तुम क्या कर रहे हो?”
ऋत्विक ने हल्की मुस्कान दी—
“मैं बहुत समय से इस द्वार की रक्षा कर रहा हूँ…”
“शायद अब… मेरा समय पूरा हो गया है।”
वैदेही ने घबराकर कहा—
“नहीं! यह सही नहीं है!”
ऋत्विक ने उसकी ओर देखा—
Shristi Kumari
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Priti Goyal
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Seema 03666
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