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नीति, तुम मेरी वो अमानत हो जिसे मैंने मौत के जबड़े..

नीति, तुम मेरी वो अमानत हो जिसे मैंने मौत के जबड़े से छीना है। अब तुम्हें इस दुनिया की धूल भी छू ले, ये तुम्हारी किस्मत में नहीं... और मेरी मर्जी के बिना तो मौत भी तुम्हें दोबारा नहीं ले जा सकती।" - प्रोफेसर मृत्युंजय



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वह महज़ एक छात्र नहीं थी, वह उसकी इबादत थी जिसे उसने सदियों पहले खो दिया था। प्रोफेसर मृत्युंजय के लिए समय ठहर गया था, जब उसने नीति को कॉलेज की सीढ़ियों पर देखा। नीति, जो पिछले जन्म में एक दूसरी दुनिया (Realm) की अलौकिक सत्ता थी, अपनी मौत
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