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ईश्विक उसे रूम में ले जाते हुए बोला_ पर जल्दबाजी क..

ईश्विक उसे रूम में ले जाते हुए बोला_ पर जल्दबाजी करने को नहीं कहा था ना।

   इप्सा धीरे से बोली_ नहीं।

ईश्विक उसे ऊपर से नीचे देखने लगा। वो बेहद सुंदर दिख रही थी। उसे यूं देखता पाकर इप्सा धीरे से बोली _ अच्छी नहीं लग रही क्या?

शायद ये पहली बार था जब इप्सा ने कोई अपनी तरह से कन्वेशन किया था। ईश्विक उसके सर को हल्का सा चूमते हुए बोला _ बहुत सुन्दर लग रही हो। मेरी तरफ से पहला तोहफा था हमारी शादी का। ओर ..

इतना कह के वो रुक गया। इप्सा सवालिया नजरो से ईश्विक को।देखने लगी।

वही ईश्विक उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया और उसका एक पैर अपनी thighs पर रख दिया।

इप्सा हैरान होकर बोली_ ये ये आप क्या कर रहे है? छोड़िए मेरे पैरों को आप मेरे पैर नहीं छू सकते।
।इतना कह के वो अपना पैर ईश्विक के ऊपर से हटा देती है। ईश्विक की पकड़ ढीली थी जिस वजह इप्सा ने अपना पैर छुड़ा दिया।

   इप्सा के पेरो को वापस से अपनी थाइज़ पर रख कर उसकी साड़ी हल्की ऊपर उठाते हुए बोला_ तुम्हारे पैर छू सकता हु में। तुम मेरे घर की लक्ष्मी हो। ओर लक्ष्मी के पैर छूने ही पड़ते है।

इप्सा उसे देखती रह गई। क्योंकि उसे अपने डैड के अलावा किसी से कोई खास मतलब नहीं था। हा एक वीर था लेकिन वो दोस्त था।

   ईश्विक ने  उसके पैरो में एक खनखनाती हुई पायल पहना दी। ओर उसके पैरो को चूम लिया।

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