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लंबी कहानी (150+ भाग) केवल Story Mania पर पढ़ेंहाँ! ये सच है कि हमारी शादी एक कॉन्ट्रैक्ट से शुरू हुई थी!" शौर्य की इस बेबाक सच्चाई ने पूरी पार्टी में जैसे बम फोड़ दिया। मीरा का चेहरा सफेद पड़ गया, उसे लगा कि आज सब खत्म हो गया।"शौर्य! अगर आज तुमने मुझे छुआ, तो कल इस हवेली से तुम्हारी लाश बाहर जाएगी!" मीरा की आवाज़ में खौफ से ज़्यादा एक अजीब सी चेतावनी थी।कमरे में सन्नाटा छा गया। शौर्य के हाथ रुक गए। उसकी आँखों में गुस्सा उबलने लगा। उसने मीरा का हाथ इतनी ज़ोर से मरोड़ा कि उसकी चूड़ियाँ कलाई में चुभ गईं। "लाश मेरी निकलेगी या तुम्हारी... ये तो वक्त तय करेगा मीरा!" शौर्य की आवाज़ किसी ठंडी छुरी जैसी थी। मीरा कांप रही थी। हवेली के बाहर बिजली कड़क रही थी। उसे अहसास हुआ कि उसने किसी इंसान से नहीं, बल्कि एक शैतान से शादी कर ली है। शौर्य ने उसे धक्का दिया और अलमारी से एक पुरानी, धूल भरी फाइल निकाली। उसने एक फोटो मीरा के चेहरे के सामने लहराई। फोटो में एक लड़की थी, जो बिलकुल मीरा जैसी दिखती थी, लेकिन उसकी आँखों की जगह दो काले छेद थे! "ये... ये कौन है?" मीरा की चीख निकल गई। शौर्य मुस्कुराया, "ये मेरी पहली पत्नी है। और जानते हो समझौते की सबसे बड़ी शर्त क्या है? तुम्हें अगले 11 महीनों तक बिलकुल इसके जैसा बनकर रहना होगा। वही कपड़े, वही खुशबू... और वही खौफ!" मीरा पीछे हटने लगी, लेकिन दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया। खिड़की के कांच पर फिर से वही खून के निशान उभरने लगे। अचानक मीरा को महसूस हुआ कि बेड के नीचे से कोई उसका पैर खींच रहा है। उसने नीचे झाँका... और जो देखा उसने उसका कलेजा मुँह को ला दिया। बेड के नीचे कोई इंसान नहीं, बल्कि एक कटी हुई उंगली पड़ी थी, जिस पर वही अंगूठी थी जो शौर्य ने अभी मीरा को पहनाई थी! अगर वो अंगूठी मीरा की उंगली में है, तो बेड के नीचे ये किसकी उंगली है? और क्या शौर्य को पता है कि इस कमरे में उनके अलावा कोई तीसरा भी मौजूद है? लो! इस पर दस्तखत करो और आज से तुम मेरी 'कागजी पत्नी' हो।" शौर्य प्रताप सिंह की आवाज ठंडी और चुभने वाली थी। उसने एक काला मखमली लिफाफा मीरा की तरफ उछाला। मीरा, जो अभी-अभी लाल जोड़े में दुल्हन बनकर इस आलीशान कमरे में आई थी, कांपते हाथों से उस लिफाफे को उठाने लगी। उसकी आँखों में आँसू थे। उसने सोचा था कि शादी का मतलब सात फेरे और उम्र भर का साथ होता है, लेकिन यहाँ तो मामला ही कुछ और था। "शौर्य जी... ये क्या है?" मीरा की आवाज हकला रही थी। शौर्य उसके करीब आया और उसका चेहरा ऊपर की तरफ उठाया। उसकी आँखों में नफरत साफ़ दिख रही थी। "यह मेरी आजादी का टिकट है और तुम्हारी गरीबी का इलाज। पूरे 100 करोड़ की जायदाद दांव पर लगी है मीरा, और मुझे बस 11 महीने के लिए दुनिया को दिखाने के लिए एक बीवी चाहिए। उसके बाद... तुम अपने रास्ते, मैं अपने।" मीरा ने पन्ना पलटा। उसमें बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था— 'विवाह समझौता' (Marriage Contract)। शर्तें पढ़कर मीरा के होश उड़ गए। मीरा को घर के बाहर एक आदर्श पत्नी का नाटक करना होगा। वह शौर्य की किसी भी निजी बात में दखल नहीं देगी। और सबसे भयानक शर्त... 'अगर मीरा ने समझौते की कोई भी बात किसी को बताई, तो उसे इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी होगी।' "साइन करो!" शौर्य चिल्लाया। मीरा ने कांपते हाथों से पेन उठाया। उसने अपने बीमार पिता का चेहरा याद किया जिनके इलाज के लिए उसे पैसों की सख्त जरूरत थी। उसने पन्ने पर दस्तखत कर दिए। शौर्य मुस्कुराया, पर वह मुस्कान डरावनी थी। उसने मीरा के गले से उसका कीमती हार झटके से उतारा। "अब से तुम इस सोने के पिंजरे की चिड़िया हो। और याद रखना... पिंजरे से भागने की कोशिश मत करना, वरना अंजाम बहुत बुरा होगा।" तभी अचानक कमरे की खिड़की जोर से खटखटाई। बाहर तूफान आ रहा था। मीरा ने खिड़की की तरफ देखा और उसकी चीख निकल गई। खिड़की के कांच पर किसी ने खून से लिखा था— 'भाग जाओ मीरा... वरना यह हवेली तुम्हें निगल जाएगी!'मीरा की सांसें अटक गईं। उसने थरथराते हाथों से शौर्य का कोट पकड़ा। "वो... वो देखिए शौर्य जी! खिड़की पर क्या लिखा है?" शौर्य ने खिड़की की तरफ देखा और फिर हिकारत से मीरा को पीछे धकेल दिया। "ड्रामा बंद करो मीरा! ये तुम्हारा कोई गाँव का खेल नहीं है। बाहर बारिश हो रही है, सिर्फ पानी की बूंदें हैं वो।" "नहीं! मैंने अपनी आँखों से खून देखा है!" मीरा चिल्लाई। शौर्य उसके चेहरे के एकदम करीब आया, उसकी आँखों में ठंडी आग थी। "इस घर में वही दिखेगा जो मैं चाहूँगा। और अभी मैं चाहता हूँ कि तुम चुपचाप उस सोफे पर सो जाओ। याद रखना, तुम मेरी पत्नी सिर्फ दुनिया के लिए हो, इस कमरे में तुम्हारी जगह उस सोफे तक ही सीमित है।" शौर्य मुड़ा और वाशरूम की तरफ जाने लगा। जाते-जाते वह रुका और बिना पीछे मुड़े बोला, "और हाँ... रात को अगर कोई दरवाजा खटखटाए, तो खोलना मत। चाहे वो आवाज मेरी ही क्यों न हो।" मीरा अकेली उस आलीशान लेकिन डरावने कमरे में खड़ी रह गई। उसके कान में शौर्य की आखिरी बात गूँज रही थी— 'चाहे वो आवाज मेरी ही क्यों न हो...'। मतलब? क्या इस कमरे में शौर्य के अलावा भी कोई और है?लेखक परिचय: नमस्ते दोस्तों! मैं हूँ आपकी अपनी कामिनी खांडे, एक सस्पेंस और डार्क रोमांस राइटर। मेरी कहानियों में आपको मिलेगा खौफ, प्यार और ऐसे राज़ जो आपकी नींद उड़ा देंगे। पाठकों के लिए संदेश: दोस्तों, "अधूरा सौदा" का यह पहला पड़ाव आपको कैसा लगा? क्या मीरा इस खौफनाक हवेली के राज़ समझ पाएगी? 🌟 अगर आपको कहानी पसंद आई, तो कृपया इसे 5-Star रेटिंग दें और अपनी कीमती राय कमेंट्स में बताएं। आपका एक छोटा सा रिव्यू मुझे और भी खतरनाक और रोमांचक एपिसोड्स लिखने की प्रेरणा देता है। अगले एपिसोड में देखिए: "आधी रात का साया और शौर्य का असली चेहरा!" > जुड़े रहिये... रोमांच अभी शुरू हुआ है!नमस्ते दोस्तों! मैं हूँ कामिनी खांडे। सस्पेंस और डार्क रोमांस की दुनिया में आपका स्वागत है। मेरी कहानियाँ सिर्फ सुनी नहीं, महसूस की जाती हैं। Support your Writer: 🌟 अगर इस पहले एपिसोड ने आपके रोंगटे खड़े कर दिए हैं, तो अभी इस कहानी को 5-Star रेटिंग दें! > आपके कमेंट्स और रेटिंग ही मुझे इस खौफनाक सफर को और भी रोमांचक बनाने की ताकत देते हैं। अगला एपिसोड (Coming Soon): "बेड के नीचे का राज़ और पहली पत्नी की रूह!" क्या मीरा सुबह का सूरज देख पाएगी? अभी Subscribe करें!समझौते की पहली रात

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