हितवंशी का मन घृणा की उस चरम सीमा पर था जहाँ इंसान को अपना ही शरीर बोझ लगने लगता है। वह बाथरूम के कोने में ठंडे फर्श पर बैठी रही, जबकि ऊपर से गिरता पानी उसके आंसुओं के साथ मिल रहा था। उर्मिश का वहशीपन उसके कंधों और होठों पर किसी ज़हरीले सांप के डंक की तरह महसूस हो रहा था। उसने अपने नाखूनों से अपनी बाहों को रगड़ना शुरू किया, जैसे वह उस छुअन की परत को ही उधेड़ देना चाहती हो।
उधर उर्मिश, अपने कमरे में वापस जाकर बिस्तर पर गिर गया था। मलेशिया का खुमार उतरा नहीं था, लेकिन हितवंशी के उस धक्के ने उसके अहंकार को चोट पहुँचाई थी। वह छत को घूर रहा था, उसकी आँखों में हवस और सत्ता का एक अजीब मेल था।
अध्याय: वहशी साया और कोख का सच
अगली सुबह विला की खामोशी और भी भारी थी। उर्मिश की वापसी ने घर के नौकरों और सुरक्षाकर्मियों को फिर से पत्थर बना दिया था। हितवंशी ने रात भर जागकर खुद को मानसिक रूप से तैयार किया था। वह जानती थी कि अगर उसने अभी हार मान ली, तो उर्मिश उसे पूरी तरह नष्ट कर देगा।
जैसे ही वह नीचे हॉल में आई, उसने देखा कि उर्मिश नाश्ते की मेज पर बैठा था। उसने आज काले रंग की शर्ट पहनी थी, जो उसके खतरनाक व्यक्तित्व को और भी उभार रही थी।
"यहाँ बैठो हेतु," उर्मिश ने बिना सिर उठाए कहा।
हितवंशी का जी चाहा कि वह वहां से भाग जाए, लेकिन वह शांति से उसके सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई। तभी निया वहां आई। निया की आँखों में डर था, लेकिन उसने हितवंशी को एक मज़बूत इशारा किया।
"उर्मिश भाई," निया ने बात शुरू की, "आज कुमुद की तबीयत बहुत खराब है। उसे चक्कर आ रहे हैं और वह कुछ खा भी नहीं पा रही।"
उर्मिश ने नफरत से अपना गिलास पटका। "उस कचरे के बारे में मुझे मत बताओ निया। मैंने उसे इस घर में सिर्फ अपनी ज़रूरत के लिए रखा था, अब वह बोझ बन गई है। चेतक से कहो उसे किसी दूर के फार्महाउस पर छोड़ आए।"
हितवंशी ने अपनी मुट्ठियाँ कसीं। उसे पता था कि यह वही पल है जब उसे अपना पासा फेंकना होगा। वह खड़ी हुई और उर्मिश की आँखों में सीधे देखते हुए बोली, "तुम उसे कहीं नहीं भेज सकते उर्मिश।"
उर्मिश ने अपनी भौहें सिकोड़ीं। "तुम मुझे रोकोगी?"
"मैं नहीं, कुमुद के भीतर पल रही वो जान तुम्हें रोकेगी," हितवंशी ने ठंडे और सपाट लहजे में कहा। "कुमुद 5 महीने की प्रेग्नेंट है। वह तुम्हारे बच्चे की माँ बनने वाली है।"
अतीत का खौफ और उर्मिश का पागलपन
जैसे ही 'प्रेग्नेंट' शब्द उर्मिश के कानों में पड़ा, उसका चेहरा सफेद पड़ गया। उसका हाथ कांपने लगा और हाथ में पकड़ा हुआ कांच का गिलास ज़मीन पर गिरकर चकनाचूर हो गया। उर्मिश के दिमाग में अचानक वही पुरानी तस्वीरें घूमने लगीं—उसकी माँ का तड़पता हुआ शरीर, खून से लथपथ कमरा और वह बदबू जिसे वह कभी भूल नहीं पाया था।
उसका गुस्सा एक पल में खौफ में बदल गया, और फिर वह खौफ एक भयानक पागलपन बन गया। वह उठा और मेज उलट दी।
"झूठ! यह झूठ है!" वह दहाड़ा। "मेरे विला में कोई बच्चा पैदा नहीं होगा! मैंने कहा था न कि मुझे उस स्थिति से नफरत है!"
वह पागलों की तरह सीढ़ियों की तरफ भागा। हितवंशी और निया उसके पीछे दौड़ीं। उर्मिश सीधे कुमुद के कमरे में घुसा। कुमुद, जो डर के मारे कंबल में लिपटी हुई थी, उसे देखकर चीख पड़ी। उर्मिश ने एक झटके में उसका कंबल हटाया। दुपट्टे के नीचे से उभरा हुआ 5 महीने का पेट अब साफ़ दिख रहा था।
उर्मिश का हाथ उठा, लेकिन वह जम गया। वह उस पेट को देख रहा था जैसे वहां कोई मौत खड़ी हो। "इसे यहाँ से निकालो! अभी! मुझे यह सब नहीं देखना!" वह चिल्लाया और कमरे से बाहर निकलकर अपने स्टडी रूम में घुस गया और दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया।
हितवंशी का बदला हुआ पासा
हितवंशी ने कुमुद को संभाला, जो बुरी तरह कांप रही थी। निया ने हितवंशी की ओर देखा। "हेतु, तुमने यह क्या किया? अब उर्मिश और भी खतरनाक हो जाएगा। वह कुमुद को मार डालेगा।"
"नहीं दी," हितवंशी ने शांत स्वर में कहा। "उर्मिश कुमुद को नहीं छुएगा। उसे उस बच्चे से डर लग रहा है क्योंकि वह उसे अपनी माँ की मौत की याद दिलाता है। वह अब कुमुद के कमरे की तरफ भी नहीं आएगा। यह हमारे लिए मौका है। वह अब विला से दूर रहने की कोशिश करेगा, और यही समय है जब हमें अपनी आज़ादी का आखिरी दांव खेलना होगा।"
हितवंशी ने खिड़की से बाहर देखा। उर्मिश के पागलपन ने उसे एक ऐसी ढाल दे दी थी जिसकी उसे ज़रूरत थी। वह जानती थी कि उर्मिश अब अपनी हवस से ज़्यादा अपने डर से लड़ेगा।
उधर, वेदांता कॉर्पोरेशन के ऑफिस में अशोक पवार को उर्मिश का फोन आया। "अशोक, मुझे अभी शहर से बाहर जाना है। कोई भी ट्रिप प्लान करो, कहीं भी ले चलो, बस मुझे इस विला से दूर ले जाओ!"
हितवंशी की योजना काम कर रही थी। उसने उर्मिश के सबसे बड़े डर का इस्तेमाल उसी के खिलाफ किया था। लेकिन वह यह भी जानती थी कि घायल भेड़िया और भी घातक होता है। अगले चार महीनों में, कुमुद के बच्चे का जन्म और उर्मिश का अंत—दोनों एक साथ होने
Namichand Gurjar
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