कुछ देर बाद…
नीवी और आर्यन लॉबी की तरफ बढ़ रहे थे।
कॉरिडोर लंबा था, सफेद रोशनी में हर चीज़ साफ दिखाई दे रही थी, लेकिन उस सफेदी में भी एक अजीब-सी ठंडक थी।
“मैं वॉशरूम होकर आती हूँ,” नीवी ने अचानक कहा।
आर्यन ने सिर हिलाया—
“मैं यहीं हूँ।”
नीवी आगे बढ़ गई।
उसके कदम धीमे थे, लेकिन मन तेज़ी से दौड़ रहा था।
जैसे ही वह कॉरिडोर के एक मोड़ पर पहुँची—
अचानक किसी ने उसका हाथ पकड़कर उसे किनारे खींच लिया।
सब कुछ इतना तेज़ हुआ कि उसे समझने का मौका ही नहीं मिला।
उसकी पीठ दीवार से टकराई।
उसका दिल जोर से धड़कने लगा।
“कौन—”
उसके शब्द वहीं रुक गए।
सामने…
सिव्यांश खड़ा था।
नीवी की आँखों में तुरंत डर उतर आया।
उसका शरीर एकदम सख्त हो गया।
सिव्यांश ने उसके दोनों बाजू पकड़ रखे थे।
“तुम ये कैसा बिहेव कर रही हो?” उसकी आवाज़ धीमी थी, लेकिन उसमें दबा हुआ गुस्सा साफ था।
नीवी चुप रही।
“जैसे हमारे बीच कुछ हुआ ही नहीं…”
उसकी पकड़ थोड़ी कस गई।
“तुम मेरे कॉल्स, मेरे मैसेजेस का जवाब क्यों नहीं दे रही थी?”
उसकी आँखों में बेचैनी थी… गुस्सा था… और कहीं न कहीं दर्द भी।
“तुम्हें पता है मुझे कितनी फिक्र थी तुम्हारी?”
नीवी अब भी चुप थी।
उसकी नजरें नीचे थीं।
कुछ सेकंड के लिए वहाँ सन्नाटा छा गया।
फिर धीरे-धीरे उसने अपना सिर उठाया।
उसकी आँखों में अब डर नहीं था।
कुछ और था।
ठंडापन।
“हो गया तुम्हारा?” उसने बहुत शांत आवाज़ में कहा।
सिव्यांश थोड़ा चौंका।
“क्या?”
नीवी ने सीधा उसकी आँखों में देखा—
“वैसे कितने टाइम से तुम मुझे जानते हो?”
उसके शब्द सीधे थे।
बिना किसी हिचक के।
सिव्यांश चुप रह गया।
“क्या रिलेशन है तुम्हारा मुझसे?”
उसकी आवाज़ अब और कठोर हो गई।
“किस हक से मुझसे इस तरह बात कर रहे हो?”
सिव्यांश के पास जवाब नहीं था।
नीवी ने एक पल के लिए रुककर उसे देखा—
और फिर वह शब्द बोले जिसने सब कुछ बदल दिया—
“तुम… मेरे लिए एक मोलेस्टर हो।”
वह शब्द जैसे हवा में जम गए।
सिव्यांश का चेहरा एकदम सख्त हो गया।
उसकी पकड़ ढीली पड़ गई।
नीवी ने तुरंत अपने हाथ छुड़ाए।
“मुझे तुमसे बात नहीं करनी,” उसने साफ शब्दों में कहा।
फिर एक सेकंड रुककर बोली—
“और हाँ… मैं सिर्फ छह महीने के लिए टीम में हूँ… इसलिए मुझसे दूरी बनाकर रखो।”
उसकी आवाज़ में अब कोई झिझक नहीं थी।
कोई डर नहीं था।
सिर्फ एक फैसला था।
वह मुड़ी…
और बिना पीछे देखे चल दी।
उसके कदम तेज़ थे, लेकिन दिल अंदर से काँप रहा था।
कॉरिडोर की सफेद रोशनी अब और भी तेज़ लग रही थी।
हर कदम के साथ उसकी साँस भारी हो रही थी, लेकिन उसने खुद को रोका नहीं।
वह सीधी आगे बढ़ती गई।
पीछे…
सिव्यांश वहीं खड़ा रह गया।
जैसे उसके पैरों ने चलना ही बंद कर दिया हो।
उसके कानों में बस एक ही शब्द गूंज रहा था—
“मोलेस्टर…”
उसने धीरे से दीवार का सहारा लिया।
उसकी साँसें भारी हो गई थीं।
उसने कभी नहीं सोचा था कि वह उसकी नजरों में इतना गिर जाएगा।
उसने जो कहा था…
क्या वह सच था?
या सिर्फ दर्द में निकले शब्द?
उसका दिमाग जवाब ढूँढने की कोशिश कर रहा था…
लेकिन दिल…
वह बस टूट रहा था।
उधर…
नीवी वापस लॉबी में पहुँची।
आर्यन वहीं खड़े थे।
उन्होंने उसे देखा—
“इतनी देर?”
नीवी ने खुद को संभाला।
“कुछ नहीं… भीड़ थी…”
आर्यन ने ध्यान से उसके चेहरे को देखा।
“तुम ठीक हो?”
नीवी ने हल्की-सी मुस्कान दी—
“हाँ…”
लेकिन उसकी आँखें कुछ और कह रही थीं।
आर्यन ने कुछ नहीं पूछा।
उन्होंने बस उसका हाथ थाम लिया।
दोनों बाहर की तरफ बढ़ गए।
बाहर…
रात पूरी तरह उतर चुकी थी।
शहर की रोशनी चमक रही थी।
लेकिन तीन लोगों की जिंदगी अब अंधेरे और रोशनी के बीच कहीं अटक गई थी।
एक तरफ सिव्यांश था—जो सच और अपने अपराधबोध के बीच फँसा हुआ था।
दूसरी तरफ नीवी—जो अपने दर्द को ताकत बनाकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।
और बीच में आर्यन—जो हर हाल में उसे संभालने के लिए खड़ा था।
कहानी अब और गहरी हो चुकी थी।
अब यह सिर्फ रिश्तों की नहीं…
पहचान, सम्मान और सच की लड़ाई बन चुकी थी।
Juli Mandal
Delete Comment
Are you sure that you want to delete this comment ?
Ishra Aalam
Delete Comment
Are you sure that you want to delete this comment ?
Saba Quraishi
Delete Comment
Are you sure that you want to delete this comment ?
Soniya Kishori
Delete Comment
Are you sure that you want to delete this comment ?
Suraj Gond
Delete Comment
Are you sure that you want to delete this comment ?
Nikita
Delete Comment
Are you sure that you want to delete this comment ?
Nishuakash Soni
Delete Comment
Are you sure that you want to delete this comment ?
Bhavisha Soni
Delete Comment
Are you sure that you want to delete this comment ?
Geeta
Delete Comment
Are you sure that you want to delete this comment ?
Rinku Verma
Delete Comment
Are you sure that you want to delete this comment ?