hello readers reborn time beyond love ka naya chapter a Gaya Hai padhakar comment kar dijiye,
महल के एक सुनसान हिस्से में एक छोटा, ठंडा और लगभग खाली कमरा था वही कमरे में सिया चुपचाप फर्श पर बैठी थी। कोई बिस्तर नहीं था कोई आराम नहीं बस पत्थर की ठंडी जमीन और दीवारों पर गिरती चाँदनी। उसने अपने घुटनों को सीने से लगा रखा था। और उसकी आँखें खुली थीं लेकिन उनमें थकान और बेचैनी साफ दिख रही थी।
ये नए जगह पर उसे काफी अजीब लग रहा था ना घर उसका ना शहर उसका और ना ही उसकी दुनिया बल्कि वह तो अपने समय से काफी पीछे आ गई थी
“ये कैसी जगह है…ना मोबाइल… ना लाइट…ना कोई नॉर्मल इंसान…बस सब कुछ अजीब है यहां...और यह दुनिया बहुत ही इंपॉसिबल है। सिया ने धीरे से खुद से कहा,
सिया हल्का सा हँसी लेकिन उस हँसी में डर छुपा था।
उसने अपनी कलाई की तरफ देखा। वही कंगन…
जो अब भी हल्की-हल्की चमक रहा था।
“सब तेरी वजह से हो रहा है…“तू आखिर है क्या…? और क्या चाहती है मुझसे... सिया ने कंगन को घूरते हुए कहा,
सिया ने गुस्से में आकर जैसे ही उसने कंगन को छुआ
एक हल्की सी गर्माहट उसके हाथ में फैल गई। जिससे
सिया चौंक गई।
“ये फिर से…? सिया ने कंगन को देखते हुए कहा\"
अचानक कमरे में हवा तेज हो गई। दरवाज़ा खुद-ब-खुद चर्रर्र… की आवाज़ के साथ हिलने लगा। सिया तुरंत अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई।
“कौन है वहाँ? सिया ने घबराते हुए कहा, लेकिन जवाब में…बस खामोशी। और फिर…एक धीमी-सी फुसफुसाहट
इतनी धीमी…सिया के कानों में पड़ी कि जैसे हवा भी उसे छुपाना चाहती हो “सिया…”
सिया का दिल जोर से धड़क उठा। उसने धीरे से कहा
“क… कौन?” उसकी आवाज काँप गई।
“तुम यहाँ की नहीं हो…”एक बार फिर से सामने से आवाज आई,
सिया की आँखें फैल गईं। और उसने जल्दी से कहा, “मुझे पता है…“तो मुझे यहाँ किसने भेजा है? उसने सामने वाले से जल्दी से सवाल किया था कि उसे उसके सवालों का जवाब मिल जाए कि वह यहां कैसे और किस लिए आई है
कुछ सेकंड की खामोशी के बाद फिर वही आवाज आई,
“सच… दरबार में सामने आएगा…और अचानक सब कुछ शांत हो गया। हवा रुक गई। दरवाज़ा स्थिर हो गया।
सिया वहीं खड़ी रह गई जैसे उसका शरीर जम गया हो।
“ये… क्या था…और यह कौन हो सकता है कहीं शक्की राजकुमार तो नहीं, सिया ने खुद से कहा, वो धीरे से पीछे हटते हुए दीवार का सहारा ले लिया। उसकी साँसें तेज थीं।
सिया ने कुछ सोचते हुए कहा, \"लेकिन ये आवाज तो शक्की राजकुमार की नही थी ऑह गॉड मैं सपना तो नहीं देख रही…उसने अपनी आँखें कसकर बंद कीं फिर खोलीं। सब कुछ वैसा ही था। लेकिन एक चीज़ बदल चुकी थी अब वो डर नहीं रही थी उसकी आँखों में एक नई चमक आ गई।
“ठीक है... कल दरबार में ही सही सच भी सामने आएगा और तुम सबका असली चेहरा भी।” सिया ने गहरी सांस लेकर कहा,
चाँदनी अब उसके चेहरे पर पड़ रही थी और इस बार
उसके चेहरे पर डर नहीं जिद थी। दूर कहीं…महल की ऊँची मीनार पर खड़ा कोई साया सब कुछ देख रहा था
और उसके होंठों पर एक धीमी मुस्कान थी “खेल शुरू हो चुका है…”
अगली सुबह...
सिया उस कमरे के एक कोने में सिमटी हुई लेटी हुई थी। उसे उसे कमरे में बंद कर दिया गया था जिस वजह से वह बाहर नहीं जा सकती थी। वह नीचे जमीन पर ही सो रही थी। वह काफी ज्यादा गहरी नींद में थी।
सुबह हो गई थी। और पंछियों के चहचआहट की आवाज उसके कानों में पढ़ रही थी। जिससे उसकी नींद धीरे-धीरे खुले लगी थी। उसकी आंखें धीरे-धीरे फड़फड़ा रही थी। उसने धीरे से अपनी आंखें खोली और उठकर बैठ गई,
अजीब मुसीबत है कहां आकर फंस गई मैं\" सिया ने खुद से परेशान होकर कहा\" उसने धीरे से अंगड़ाई ली, नीचे फर्श पर सोने की वजह से उसकी पूरी बॉडी में दर्द हो रहा था।
तभी सिया के कानों में शोर की आवाज पड़ी\" अब ये आवाज़ कैसी, कहीं कोई मर गया है क्या\" शायद इस राज्य में ही कोई मर गया होगा। और यह लोग ऐसे ही मातम, मेरा मतलब है। शौक मनाते होंगे, सिया ने खुद से नाक मुंह बना कर कहा\"
तभी खटखट की आवाज सिया के कानों में पड़ी, जिसे वह इस आवाज को गौर से सुनकर समझने की कोशिश करने लगी। क्योंकि यह आवाज उसके कमरें के नजदीक से ही आ रही थी। ऐसा लग रहा था दो-चार लोग उसके कमरे की तरफ ही बढ़ रहे हो।
सियानी इस आवाज को सुनकर कहां, \"यह आवाज तो मेरे ही कमरे की तरफ से आ रहा है। जरूर कोई मेरे कमरे की तरफ आ रहा है।
लगता है मेरा बुलावा आ गया है। जरूर वह झूठा राजकुमार यहां आ रहा है। मुझे कटघरे में पेश करने के लिए, \"सॉरी मतलब उनके यहां तो राज्य दरबार होता है। हां राज्य दरबार में पेश करने के लिए, उसने गुस्से में मुंह बिचका कर कहा\"
तभी कमरे का दरवाजा एक क्लिक के साथ खुला और दो सैनिक अंदर आ गए, सिया ने उन सैनिकों को अजीब नजरों से देखा जो उसकी तरफ ही बड़ रहे थे। उन सबको देखकर उसने बुरा सा मुंह बनाया।
एक सैनिक ने सिया को बाजू से पकड़ा, तो सिया गुस्से से चिल्ला उठी \"ये ये क्या कर रहे हो पागल हो गए हो क्या तुम सब छोड़ो मेरा हाथ,
लेकिन उन सैनिक ने सिया के बाजू को नहीं छोड़ा। और उसे कमरें से लगभग घसीटते हुए वहां से बाहर लेकर चले गए,
यह यह क्या कर रहे हो तुम सब में इंसान हूं कोई जानवर नहीं जो मुझे ऐसे घसीट कर ले जा रहे हो, सिया ने गुस्से में चिल्लाते हुए कहां\" और अपने हाथ को छुड़ाने की कोशिश करने लगी। पर उनकी पकड़ बहुत ज्यादा मजबूत थी। जिस वजह से वह खुद को उनकी पकड़ से आजाद ही नहीं कर पा रही थी। और सिया को राज्य दरबार में लेकर आ गए,
सिया ने गुस्से में चिल्लाते हुए कहां,\"छोड़ो मुझे तुम सबके कानों में मेरी आवाज नहीं जा रही है क्या बहरे हो तुम सब\"
सिया ने गुस्से में सब की तरफ देखा राज्य दरबार के सभी लोग उसे ही अजीब नजरों से देख रहे थे। जैसे वह इंसान ना होकर कोई अजीब ही प्राणी हो।
एक्सक्यूज मी... तुम सब मुझे ऐसे आगे और क्यों रहे हो। क्या तुम सब ने कहीं लड़की नहीं देखी है। अपनी आंखें नीचे करो नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। ठरकी इंसान, सिया ने उन सब की तरफ देखकर गुस्से में भड़कते हुए कहा,
सिया की बातें वहां पर बैठे किसी को भी समझ नहीं आ रही थी। सभी लोग उसे और भी ज्यादा अजीब नजरों से देख रहे थे।
सिया ने उन सब की तरफ देखकर अपना सर न में हिलाते हुए कहा,\"यह सब पागल है क्या अभी भी मुझे ऐसे ही देख रहे हैं... I can\'t believe this... मुझे तो यकीन नहीं होता। इस राज्य के लोग लड़कियों को ऐसी गंदी नजरों से देखते हैं।
वही सिया की आवाज सुनकर राजकुमार युवान ने उसकी तरफ देखा। जो अपने गुस्से में सैनिकों को अजीब अजीब चार बातें सुनाए जा रही थी। उसने धीरे से अपनी आंखें घुमाई, और अपने कदम सिया की तरफ बढ़ा दिए,
राजकुमार युवान ठीक सिया के सामने आकर खड़ा हो गया \"छोड़ो इसे, उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया उसके आदेश पर सैनिक ने सिया के हाथ को छोड़ दिया।
सिया ने अपने हाथ को देखा। जो सैनिक के पकड़ने से उसका हाथ लाल हो गया था। उसने गुस्से में युवान की तरफ देखकर कहा, \"यह सब क्या है। तुम्हारे चमचे ने इतनी जोर से मेरा हाथ क्यों पकड़ा, और इतनी कसके कोई किसी का हाथ पकड़ता है क्या, अरे अगर अभी थोड़ी देर तुम्हारे चमचे मेरे हाथ को नहीं छोड़ते तो मेरा हाथ तो टूट ही जाना था।
सिया की बातों से परेशान होकर युवान ने धीरे से कहा, \"यह मेरे सैनिक है।
हां वही जो भी हो। मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता पर तुम लोग मेरे साथ इतनी जियात्ती नहीं कर सकते, सिया ने युवान को होते हुए कहा,
बस अब तुम अपने बातों का पिटारा बंद कर दो। तो अच्छा होगा यह तुम्हारा घर नहीं यह मेरा राज्य दरबार है। और यहां इस तरह से बात मत करो। नहीं तो तुम्हारी सजा बढ़ सकती है। युवान ने सिया को देखते हुए ठंडा लहजे में कहा,
तुम मुझे कंट्रोल करना चाहते हो। लेकिन मैं ऐसा कभी नहीं होने दूंगी। भाड़ में गए तुम और भाड़ में गया तुम्हारा राज्य दरबार सिया कह रही थी।
तभी उसके शब्द उसके मुंह में ही रह गई, उसकी हैरान निगाहें सामने की तरफ थी। और वह मुंह खुला रह गया। और वो सामने की तरफ देख रही थी।
सिया की नज़र सामने टिक गई। और वह एक टक सामने ही देखने लगी। आँखें हैरानी से फैल गईं उसने धीरे से कहा, “ये… कैसे हो सकता है…
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Priti Goyal
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