खूबसूरत कोशिश
ना किस्सों का शहर हूँ मैं, ना कोई मोटी किताब,
मेरे पास तो बस कविताओं के हैं कुछ मीठे ख्वाब।
नन्हीं-नन्हीं पंक्तियों में दिल की बात कहती हूँ,
स्याही बनकर बस एहसासों की नदी में बहती हूँ।
पर अब मन में ठानी है, एक नया आगाज़ करने की,
किस्से बुनने, पन्ने भरने और कहानी की परवाज़ भरने की।
अपनी कविताओं के हुनर को अब नया विस्तार देना है,
अधूरे किरदारों को भी अपनी कलम से प्यार देना है।
शायद अल्फ़ाज़ थोड़े ठहरें, शायद कहानी लड़खड़ाए,
पर कोशिश यही है कि हर शब्द दिल को छू जाए।
कविता मेरी रूह है, तो कहानी मेरा हौसला बनेगी,
देखना मेरी ये कलम, एक दिन नई दास्तां कहेगी।