ek new triangle
I want you
chek this my new story
ek new triangle
I want you
chek this my new story
विला के उस विशाल और ठंडे कमरे में आज मौत और जिंदगी के बीच का पर्दा बेहद झीना हो गया था। बाहर कुदरत अपना सबसे भयानक रूप दिखा रही थी। बादलों के गरजने की आवाज़ें ऐसी थीं मानो आसमान किसी पुरानी नफरत का बदला ले रहा हो। मूसलाधार बारिश की बूंदें विला की कांच की खिड़कियों पर गोलियों की तरह टकरा रही थीं। शहर से विला को जोड़ने वाले सारे रास्ते भूस्खलन और उखड़े हुए पेड़ों की वजह से बंद हो चुके थे। विला अब एक द्वीप बन चुका था—एक ऐसा टापू जहाँ केवल चीखें गूँज रही थीं। दहशत का कॉल और एक वहशी का डर पूरे चार महीने और पंद्रह दिन बीत चुके थे। उर्मिश राव, जो इस विला का बेताज बादशाह था, आज खंडाला के अपने एकांत फार्महाउस में अपने ही सायों से लड़ रहा था। लेकिन विला के भीतर कुमुद की कोख का वह \'सच\' अब बाहर आने को बेताब था। निया के हाथ कांप रहे थे। उसने शहर के हर बड़े अस्पताल और डॉक्टर को फोन लगाया, लेकिन तूफान की वजह से किसी का आना नामुमकिन था। विला शहर की मुख्य आबादी से बहुत दूर था। जब कोई रास्ता नहीं बचा, तो उसने भारी मन से उर्मिश का नंबर डायल किया। \"हेलो! कौन है?\" उर्मिश की आवाज़ में शराब का नशा और चिड़चिड़ापन साफ था। \"भाई... मैं निया। भाई, प्लीज जल्दी घर आ जाओ! यहाँ हालत बहुत बिगड़ गई है!\" निया की आवाज़ सिसकियों में डूबी थी। उर्मिश का माथा ठनका। \"क्या! क्या हुआ? हितवंशी को कुछ हुआ है क्या?\" \"नहीं भाई, हितवंशी ठीक है। वह... कुमुद... उसे लेबर पेन शुरू हो गया है। बाहर तूफान है, कोई डॉक्टर नहीं पहुँच पा रहा। हम क्या करें?\" \'लेबर पेन\' शब्द सुनते ही उर्मिश के कानों में जैसे गरम सीसा उड़ेल दिया गया हो। उसके दिमाग में तीस साल पुरानी वही रात कौंधी, जब उसकी माँ ने उसे और निया को जन्म देते समय तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया था। वह दृश्य उसके लिए एक कभी न खत्म होने वाला दुस्वप्न था। \"तो मैं क्या करूँ?\" उर्मिश दहाड़ा। \"मैं कोई डॉक्टर नहीं हूँ! और तुमने ही जिद की थी इस बच्चे को यहाँ तक लाने की, वरना आज यह नौबत ही नहीं आती। आइंदा मुझे इस मनहूसियत के लिए फोन मत करना, वरना अंजाम अच्छा नहीं होगा!\" फोन कट गया। उर्मिश ने गुस्से में फोन दीवार पर दे मारा, लेकिन उसका सीना धौंकनी की तरह चल रहा था। उसका डर अब उसके गुस्से पर हावी होने लगा था। हितवंशी: एक मासूम का साहस कमरे के भीतर, कुमुद का शरीर धनुष की तरह ऐंठ रहा था। उसकी आँखों से आंसू और माथे से पसीना बहकर बिस्तर की चादर को भिगो रहा था। हितवंशी (हेतु), जो अब सत्रह साल की हो चुकी थी, ने अपनी बायोलॉजी की किताबों और मेडिकल ज्ञान को अपनी आखिरी उम्मीद बनाया। \"निया दी, घबराइए मत। मैंने स्कूल में इसके बारे में पढ़ा है। हम हार नहीं मान सकते,\" हितवंशी ने अपनी कांपती आवाज़ को स्थिर करते हुए कहा। हितवंशी ने दस्ताने पहने और गरम पानी व साफ कपड़ों का इंतज़ाम किया। जब उसने जाँच की, तो पाया कि कुमुद का शरीर (Vulva) पूरी तरह खुल चुका था। उसे बच्चे का सिर (Crown) साफ दिखाई देने लगा। \"कुमुद! हिम्मत मत हारो! जब मैं कहूँ, तब पूरी ताकत से धक्का दो!\" हितवंशी ने चिल्लाकर कहा। कुमुद ने अपनी पूरी शक्ति झोंक दी। एक बार... दो बार... बिजली कड़की और पूरा विला रोशनी से नहा गया। पांचवें ज़ोरदार धक्के के साथ कुमुद की आँखों के आगे अंधेरा छा गया और वह बेसुध होकर पीछे गिर पड़ी। हितवंशी ने फौरन बच्चे के कंधों को पकड़ा और उसे बाहर खींच लिया। लेकिन उस पल जो हुआ, उसने विला के इतिहास को हमेशा के लिए लाल रंग से रंग दिया। हितवंशी ने देखा कि प्लेसेंटा (Placenta) अपने आप अलग नहीं हुआ था और वहां से भीषण रक्तस्राव (Postpartum Hemorrhage) शुरू हो गया था। सफ़ेद बेडशीट देखते ही देखते सुर्ख लाल हो गई। खून का सैलाब रुकने का नाम नहीं ले रहा था। नियति का क्रूर साक्षात्कार ठीक उसी पल, कमरे का दरवाज़ा एक झटके से खुला। उर्मिश राव, जिसे खंडाला में एक पल भी चैन नहीं मिला था, अपनी जान हथेली पर रखकर तूफान में गाड़ी चलाकर विला पहुँच गया था। उसे अपनी माँ की मौत का वही पुराना अपराधबोध और डर यहाँ खींच लाया था। जैसे ही उसने कमरे में कदम रखा, उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। सामने हितवंशी खड़ी थी, जिसके दोनों हाथ कोहनियों तक ताज़ा और गरम खून में डूबे हुए थे। उसके हाथों में एक नन्हा सा बच्चा था—जो पूरी तरह खामोश था, न कोई हलचल, न कोई रोने की आवाज़। और बिस्तर पर... बिस्तर पर कुमुद की बेजान देह पड़ी थी, जो अत्यधिक खून बह जाने के कारण सफ़ेद संगमरमर की तरह ठंडी और पीली पड़ चुकी थी। उर्मिश के गले से एक ऐसी चीख निकली जो शायद इस तूफान से भी ज़्यादा भयानक थी। उसे लगा कि वह अपनी माँ की लाश दोबारा देख रहा है। उसका दिमाग इस वीभत्स दृश्य का भार नहीं उठा पाया। उसकी आँखें पथरा गईं और वह वहीं फर्श पर एक भारी बोरे की तरह बेहोश होकर गिर पड़ा। शून्य का सन्नाटा कमरे में अब कोई चीख नहीं थी। हितवंशी पागलों की तरह बच्चे के तलवों को थपथपा रही थी, उसे सहला रही थी, \"रोओ! प्लीज रोओ!\" लेकिन वह मासूम जान भी खामोश थी। कुमुद अपनी कैद से, उर्मिश के जुल्मों से और इस दुनिया के हर दर्द से आज़ाद होकर भगवान के पास जा चुकी थी। हितवंशी की हिम्मत जवाब दे गई। वह जिस बच्चे को अपनी जीत का हथियार समझ रही थी, वह बेजान था। और जिस कुमुद को वह आज़ादी दिलाना चाहती थी, वह मर चुकी थी। मानसिक आघात और शारीरिक थकान ने हितवंशी को भी तोड़ दिया। उसकी आँखों के आगे धुंध छा गई और वह भी उसी खून से सने फर्श पर अचेत होकर गिर पड़ी। बाहर तूफान अब भी जारी था, बिजली अब भी कड़क रही थी, लेकिन विला के उस कमरे में अब सिर्फ तीन \'लाशें\' जैसी देह और एक रोती हुई निया बची थी। अब सब कुछ निया के कंधों पर था। उसे ही तय करना था कि यह रात विनाश का अंत है या किसी और भी खौफनाक दास्तान की:
💔
कुछ देर बाद…
नीवी और आर्यन लॉबी की तरफ बढ़ रहे थे।
कॉरिडोर लंबा था, सफेद रोशनी में हर चीज़ साफ दिखाई दे रही थी, लेकिन उस सफेदी में भी एक अजीब-सी ठंडक थी।
“मैं वॉशरूम होकर आती हूँ,” नीवी ने अचानक कहा।
आर्यन ने सिर हिलाया—
“मैं यहीं हूँ।”
नीवी आगे बढ़ गई।
उसके कदम धीमे थे, लेकिन मन तेज़ी से दौड़ रहा था।
जैसे ही वह कॉरिडोर के एक मोड़ पर पहुँची—
अचानक किसी ने उसका हाथ पकड़कर उसे किनारे खींच लिया।
सब कुछ इतना तेज़ हुआ कि उसे समझने का मौका ही नहीं मिला।
उसकी पीठ दीवार से टकराई।
उसका दिल जोर से धड़कने लगा।
“कौन—”
उसके शब्द वहीं रुक गए।
सामने…
सिव्यांश खड़ा था।
नीवी की आँखों में तुरंत डर उतर आया।
उसका शरीर एकदम सख्त हो गया।
सिव्यांश ने उसके दोनों बाजू पकड़ रखे थे।
“तुम ये कैसा बिहेव कर रही हो?” उसकी आवाज़ धीमी थी, लेकिन उसमें दबा हुआ गुस्सा साफ था।
नीवी चुप रही।
“जैसे हमारे बीच कुछ हुआ ही नहीं…”
उसकी पकड़ थोड़ी कस गई।
“तुम मेरे कॉल्स, मेरे मैसेजेस का जवाब क्यों नहीं दे रही थी?”
उसकी आँखों में बेचैनी थी… गुस्सा था… और कहीं न कहीं दर्द भी।
“तुम्हें पता है मुझे कितनी फिक्र थी तुम्हारी?”
नीवी अब भी चुप थी।
उसकी नजरें नीचे थीं।
कुछ सेकंड के लिए वहाँ सन्नाटा छा गया।
फिर धीरे-धीरे उसने अपना सिर उठाया।
उसकी आँखों में अब डर नहीं था।
कुछ और था।
ठंडापन।
“हो गया तुम्हारा?” उसने बहुत शांत आवाज़ में कहा।
सिव्यांश थोड़ा चौंका।
“क्या?”
नीवी ने सीधा उसकी आँखों में देखा—
“वैसे कितने टाइम से तुम मुझे जानते हो?”
उसके शब्द सीधे थे।
बिना किसी हिचक के।
सिव्यांश चुप रह गया।
“क्या रिलेशन है तुम्हारा मुझसे?”
उसकी आवाज़ अब और कठोर हो गई।
“किस हक से मुझसे इस तरह बात कर रहे हो?”
सिव्यांश के पास जवाब नहीं था।
नीवी ने एक पल के लिए रुककर उसे देखा—
और फिर वह शब्द बोले जिसने सब कुछ बदल दिया—
“तुम… मेरे लिए एक मोलेस्टर हो।”
वह शब्द जैसे हवा में जम गए।
सिव्यांश का चेहरा एकदम सख्त हो गया।
उसकी पकड़ ढीली पड़ गई।
नीवी ने तुरंत अपने हाथ छुड़ाए।
“मुझे तुमसे बात नहीं करनी,” उसने साफ शब्दों में कहा।
फिर एक सेकंड रुककर बोली—
“और हाँ… मैं सिर्फ छह महीने के लिए टीम में हूँ… इसलिए मुझसे दूरी बनाकर रखो।”
उसकी आवाज़ में अब कोई झिझक नहीं थी।
कोई डर नहीं था।
सिर्फ एक फैसला था।
वह मुड़ी…
और बिना पीछे देखे चल दी।
उसके कदम तेज़ थे, लेकिन दिल अंदर से काँप रहा था।
कॉरिडोर की सफेद रोशनी अब और भी तेज़ लग रही थी।
हर कदम के साथ उसकी साँस भारी हो रही थी, लेकिन उसने खुद को रोका नहीं।
वह सीधी आगे बढ़ती गई।
पीछे…
सिव्यांश वहीं खड़ा रह गया।
जैसे उसके पैरों ने चलना ही बंद कर दिया हो।
उसके कानों में बस एक ही शब्द गूंज रहा था—
“मोलेस्टर…”
उसने धीरे से दीवार का सहारा लिया।
उसकी साँसें भारी हो गई थीं।
उसने कभी नहीं सोचा था कि वह उसकी नजरों में इतना गिर जाएगा।
उसने जो कहा था…
क्या वह सच था?
या सिर्फ दर्द में निकले शब्द?
उसका दिमाग जवाब ढूँढने की कोशिश कर रहा था…
लेकिन दिल…
वह बस टूट रहा था।
उधर…
नीवी वापस लॉबी में पहुँची।
आर्यन वहीं खड़े थे।
उन्होंने उसे देखा—
“इतनी देर?”
नीवी ने खुद को संभाला।
“कुछ नहीं… भीड़ थी…”
आर्यन ने ध्यान से उसके चेहरे को देखा।
“तुम ठीक हो?”
नीवी ने हल्की-सी मुस्कान दी—
“हाँ…”
लेकिन उसकी आँखें कुछ और कह रही थीं।
आर्यन ने कुछ नहीं पूछा।
उन्होंने बस उसका हाथ थाम लिया।
दोनों बाहर की तरफ बढ़ गए।
बाहर…
रात पूरी तरह उतर चुकी थी।
शहर की रोशनी चमक रही थी।
लेकिन तीन लोगों की जिंदगी अब अंधेरे और रोशनी के बीच कहीं अटक गई थी।
एक तरफ सिव्यांश था—जो सच और अपने अपराधबोध के बीच फँसा हुआ था।
दूसरी तरफ नीवी—जो अपने दर्द को ताकत बनाकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।
और बीच में आर्यन—जो हर हाल में उसे संभालने के लिए खड़ा था।
कहानी अब और गहरी हो चुकी थी।
अब यह सिर्फ रिश्तों की नहीं…
पहचान, सम्मान और सच की लड़ाई बन चुकी थी।
हितवंशी का मन घृणा की उस चरम सीमा पर था जहाँ इंसान को अपना ही शरीर बोझ लगने लगता है। वह बाथरूम के कोने में ठंडे फर्श पर बैठी रही, जबकि ऊपर से गिरता पानी उसके आंसुओं के साथ मिल रहा था। उर्मिश का वहशीपन उसके कंधों और होठों पर किसी ज़हरीले सांप के डंक की तरह महसूस हो रहा था। उसने अपने नाखूनों से अपनी बाहों को रगड़ना शुरू किया, जैसे वह उस छुअन की परत को ही उधेड़ देना चाहती हो।
उधर उर्मिश, अपने कमरे में वापस जाकर बिस्तर पर गिर गया था। मलेशिया का खुमार उतरा नहीं था, लेकिन हितवंशी के उस धक्के ने उसके अहंकार को चोट पहुँचाई थी। वह छत को घूर रहा था, उसकी आँखों में हवस और सत्ता का एक अजीब मेल था।
अध्याय: वहशी साया और कोख का सच
अगली सुबह विला की खामोशी और भी भारी थी। उर्मिश की वापसी ने घर के नौकरों और सुरक्षाकर्मियों को फिर से पत्थर बना दिया था। हितवंशी ने रात भर जागकर खुद को मानसिक रूप से तैयार किया था। वह जानती थी कि अगर उसने अभी हार मान ली, तो उर्मिश उसे पूरी तरह नष्ट कर देगा।
जैसे ही वह नीचे हॉल में आई, उसने देखा कि उर्मिश नाश्ते की मेज पर बैठा था। उसने आज काले रंग की शर्ट पहनी थी, जो उसके खतरनाक व्यक्तित्व को और भी उभार रही थी।
"यहाँ बैठो हेतु," उर्मिश ने बिना सिर उठाए कहा।
हितवंशी का जी चाहा कि वह वहां से भाग जाए, लेकिन वह शांति से उसके सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई। तभी निया वहां आई। निया की आँखों में डर था, लेकिन उसने हितवंशी को एक मज़बूत इशारा किया।
"उर्मिश भाई," निया ने बात शुरू की, "आज कुमुद की तबीयत बहुत खराब है। उसे चक्कर आ रहे हैं और वह कुछ खा भी नहीं पा रही।"
उर्मिश ने नफरत से अपना गिलास पटका। "उस कचरे के बारे में मुझे मत बताओ निया। मैंने उसे इस घर में सिर्फ अपनी ज़रूरत के लिए रखा था, अब वह बोझ बन गई है। चेतक से कहो उसे किसी दूर के फार्महाउस पर छोड़ आए।"
हितवंशी ने अपनी मुट्ठियाँ कसीं। उसे पता था कि यह वही पल है जब उसे अपना पासा फेंकना होगा। वह खड़ी हुई और उर्मिश की आँखों में सीधे देखते हुए बोली, "तुम उसे कहीं नहीं भेज सकते उर्मिश।"
उर्मिश ने अपनी भौहें सिकोड़ीं। "तुम मुझे रोकोगी?"
"मैं नहीं, कुमुद के भीतर पल रही वो जान तुम्हें रोकेगी," हितवंशी ने ठंडे और सपाट लहजे में कहा। "कुमुद 5 महीने की प्रेग्नेंट है। वह तुम्हारे बच्चे की माँ बनने वाली है।"
अतीत का खौफ और उर्मिश का पागलपन
जैसे ही 'प्रेग्नेंट' शब्द उर्मिश के कानों में पड़ा, उसका चेहरा सफेद पड़ गया। उसका हाथ कांपने लगा और हाथ में पकड़ा हुआ कांच का गिलास ज़मीन पर गिरकर चकनाचूर हो गया। उर्मिश के दिमाग में अचानक वही पुरानी तस्वीरें घूमने लगीं—उसकी माँ का तड़पता हुआ शरीर, खून से लथपथ कमरा और वह बदबू जिसे वह कभी भूल नहीं पाया था।
उसका गुस्सा एक पल में खौफ में बदल गया, और फिर वह खौफ एक भयानक पागलपन बन गया। वह उठा और मेज उलट दी।
"झूठ! यह झूठ है!" वह दहाड़ा। "मेरे विला में कोई बच्चा पैदा नहीं होगा! मैंने कहा था न कि मुझे उस स्थिति से नफरत है!"
वह पागलों की तरह सीढ़ियों की तरफ भागा। हितवंशी और निया उसके पीछे दौड़ीं। उर्मिश सीधे कुमुद के कमरे में घुसा। कुमुद, जो डर के मारे कंबल में लिपटी हुई थी, उसे देखकर चीख पड़ी। उर्मिश ने एक झटके में उसका कंबल हटाया। दुपट्टे के नीचे से उभरा हुआ 5 महीने का पेट अब साफ़ दिख रहा था।
उर्मिश का हाथ उठा, लेकिन वह जम गया। वह उस पेट को देख रहा था जैसे वहां कोई मौत खड़ी हो। "इसे यहाँ से निकालो! अभी! मुझे यह सब नहीं देखना!" वह चिल्लाया और कमरे से बाहर निकलकर अपने स्टडी रूम में घुस गया और दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया।
हितवंशी का बदला हुआ पासा
हितवंशी ने कुमुद को संभाला, जो बुरी तरह कांप रही थी। निया ने हितवंशी की ओर देखा। "हेतु, तुमने यह क्या किया? अब उर्मिश और भी खतरनाक हो जाएगा। वह कुमुद को मार डालेगा।"
"नहीं दी," हितवंशी ने शांत स्वर में कहा। "उर्मिश कुमुद को नहीं छुएगा। उसे उस बच्चे से डर लग रहा है क्योंकि वह उसे अपनी माँ की मौत की याद दिलाता है। वह अब कुमुद के कमरे की तरफ भी नहीं आएगा। यह हमारे लिए मौका है। वह अब विला से दूर रहने की कोशिश करेगा, और यही समय है जब हमें अपनी आज़ादी का आखिरी दांव खेलना होगा।"
हितवंशी ने खिड़की से बाहर देखा। उर्मिश के पागलपन ने उसे एक ऐसी ढाल दे दी थी जिसकी उसे ज़रूरत थी। वह जानती थी कि उर्मिश अब अपनी हवस से ज़्यादा अपने डर से लड़ेगा।
उधर, वेदांता कॉर्पोरेशन के ऑफिस में अशोक पवार को उर्मिश का फोन आया। "अशोक, मुझे अभी शहर से बाहर जाना है। कोई भी ट्रिप प्लान करो, कहीं भी ले चलो, बस मुझे इस विला से दूर ले जाओ!"
हितवंशी की योजना काम कर रही थी। उसने उर्मिश के सबसे बड़े डर का इस्तेमाल उसी के खिलाफ किया था। लेकिन वह यह भी जानती थी कि घायल भेड़िया और भी घातक होता है। अगले चार महीनों में, कुमुद के बच्चे का जन्म और उर्मिश का अंत—दोनों एक साथ होने
Saba Quraishi
تبصرہ حذف کریں۔
کیا آپ واقعی اس تبصرہ کو حذف کرنا چاہتے ہیں؟
AFSANA BANO
تبصرہ حذف کریں۔
کیا آپ واقعی اس تبصرہ کو حذف کرنا چاہتے ہیں؟
Soniya Kishori
تبصرہ حذف کریں۔
کیا آپ واقعی اس تبصرہ کو حذف کرنا چاہتے ہیں؟