चकाचौंध भरी रोशनियों के बीच, आरव के लिए सब कुछ धुंधला हो गया था। सिर्फ़ एक चीज़ साफ़ नज़र आ रही थी—रैंप पर चलती हुई आरोही। पर आरव की आँखों में आरोही का चेहरा नहीं, बल्कि अपनी माँ का वो अधूरा सपना तैर रहा था।
उसने अपनी आँखें बंद कीं और एक पल के लिए कल्पना की... फ्लैशलाइट्स की वो बौछारें आरोही पर नहीं, उस पर पड़ रही हैं। वो नीले रंग का मखमली गाउन एक काले रंग के शाही शेरवानी में बदल गया है। वो चाल, वो अदा, वो आत्मविश्वास... वो सब आरव का अपना है। वो रैंप के आखिर में खड़ा है, और भीड़ आरोही का नहीं, आरव का नाम चिल्ला रही है।
Anu Garg
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Vijayanta Siyag
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Niku Choudhary
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